गांठ
" पापा ! ताईजी को शायद कैंसर है !" बेटा धड़धड़ाते हुए कमरे में घुसा . " कहां से चले आ रहे हो रिपोर्टर बने हुए ? पता भी है क्या बोल रहे हो ..?" मैंने महसूस किया कि दिसंबर की ठंड में भी पसीना मेरी कनपटी भिगो रहा था . " डाॅक्टर अंकल हैं ना , संतोष अंकल … मिले थे अभी पार्क में ! बता रहे थे ताईजी के गले में , यहां पर एक गांठ है छोटी - सी … कोई टेस्ट किया है चार दिन पहले , आज रिपोर्ट आएगी ." बेटे की आंखें भर आई थीं ! मैं अपराधबोध ...